Saturday, August 5, 2017

जिन्दगी

#जिन्दगी कभी दुःख नही देती बल्कि जिना सिखाती है...
बस ये इंसान है जो सबका मजाक उडाता है....
ये दुनिया है जो नफ़रत सिखाती है...
बस जिंदगी सिखाती हैं ...उसे अपना लेना चाहिए....
जिंदगी हमेशा जीना सिखाती है।
@vk......😊

Saturday, January 10, 2015

New Beginning :- एक नयी शुरुआत – Rules of Success

दोस्तों जीवन (Life) में हमारे पास अपने लिए मात्र 3500 दिन (9 वर्ष व 6 महीने) ही होते है !
वर्ल्ड बैंक ने एक इन्सान की औसत आयु 78 वर्ष मानकर यह आकलन किया है जिसके अनुसार हमारे पास अपने लिए मात्र 9 वर्ष व 6 महीने ही होते है| इस आकलन के अनुसार औसतन 29 वर्ष सोने में, 3-4 वर्ष शिक्षा में, 10-12 वर्ष रोजगार में, 9-10 वर्ष मनोरंजन में, 15-18 वर्ष­ अन्य रोजमरा के कामों में जैसे खाना पीना, यात्रा, नित्य कर्म, घर के काम इत्यादि में खर्च हो जाते है| इस तरह हमारे पास अपने सपनों (Dreams) को पूरा करने व कुछ कर दिखाने के लिए मात्र 3500 दिन अथवा 84,000 घंटे ही होते है|
“संसार की सबसे मूल्यवान वस्तु समय ही है”
लेकिन वर्तमान में ज्यादातर लोग निराशामय जिंदगी (Life) जी रहे है और वे इंतजार कर रहे होते है कि उनके जीवन में कोई चमत्कार होगा, जो उनकी निराशामय जिंदगी को बदल देगा| दोस्तों वह चमत्कार आज व अभी से शुरू होगा और उस चमत्कार को करने वाले व्यक्ति आप ही है, क्योंकि उस चमत्कार को आप के अलावा कोई दूसरा व्यक्ति नहीं कर सकता|
इस शुरुआत के लिए हमें अपनी सोच व मान्यताओ (beliefs) को बदलना होगा, क्योंकि
“हमारे साथ वही होता है जो हम मानते है|”
Friends, वैज्ञानिकों के अनुसार भौंरे (Bumblebee) का शरीर बहुत भारी होता है, इसलिए विज्ञान के नियमो के अनुसार वह उड़ नहीं सकता| लेकिन भौंरे को इस बात का पता नहीं होता एंव वह यह मानता है की वह उड़ सकता है इसलिए वह उड़ पाता है|
सबसे पहले हमें इस गलत धारणा (Wrong Belief) को बदलना होगा कि हमारे साथ वही होता है जो भाग्य (Bhagya) में लिखा होता है| क्योंकि ऐसा होता तो आज हम ईश्वर (God) की पूजा न कर रहे होते बल्कि उन्हें बदुआएं दे रहे होते|
दोस्तों हमारे साथ जो कुछ भी होता है उसके जिम्मेदार हम स्वंय होते है (We are responsible for What we are) इसलिए खुश रहना या ना रहना हम पर ही निर्भर (depend) करता है|
“भगवान उसी की मदद करते है जो अपनी मदद खुद करता है”
“God helps those who help themselves”
अगर कोई व्यक्ति यह सोचता है की हमारे साथ जो कुछ भी होता है, वह हमारे हाथ में नहीं है तो वह व्यक्ति या तो इस गलत धारणा (Wrong Belief) को बदल दे या आगे इस लेख (Hindi Article) को न पढे|
जीवन के नियम :- Rules of life
दोस्तों हम एक नयी शुरुआत करने जा रहे है और इसके लिए हमें कुछ नियमो का पालन करना होगा| ये नियम आपकी जिंदगी बदल देंगे ( Rules That can Change Your Life in Hindi) :-

  1. आत्मविश्वास (Self Confidence) :-
आत्मविश्वास से आशय “स्वंय पर विश्वास एंव नियंत्रण” (Believe in Yourself) से है | दोस्तों हमारे जीवन में आत्मविश्वास (Self Confidence) का होना उतना ही आवश्यक है जितना किसी फूल (Flower) में खुशबू (सुगंध) का होना, आत्मविश्वास (Self Confidence) के बगैर हमारी जिंदगी एक जिन्दा लाश के समान हो जाती है| कोई भी व्यक्ति कितना भी प्रतिभाशाली क्यों न हो वह आत्मविश्वास के बिना कुछ नहीं कर सकता| आत्मविश्वास ही सफलता (Success) की नींव है, आत्मविश्वास की कमी के कारण व्यक्ति अपने द्वारा किये गए कार्य पर संदेह करता है| आत्मविश्वास (Self Confidence) उसी व्यक्ति के पास होता है जो स्वंय से संतुष्ट होता है एंव जिसके पास दृड़ निश्चय, मेहनत (Hardwork) व लगन (Focused), साहस (Fearless ) , वचनबद्धता (Commitment) आदि संस्कारों की सम्पति होती है|
आत्मविश्वास कैसे बढाएं:- How To Improve Self Confidence In – Hindi

  1. स्वंय पर विश्वास रखें (Believe in Yourself), लक्ष्य बनायें (make smart goals) एंव उन्हें पूरा करने के लिए वचनबद्ध रहें| जब आप अपने द्वारा बनाये गए लक्ष्य (Goals) को पूरा करते है तो यह आपके आत्मविश्वास (Self Confidence) को कई गुना बढ़ा देता है|
  2. खुश रहें (Be Happy), खुद को प्रेरित करें (Motivate Yourself), असफलता (Failure) से दुखी न होकर उससे सीख लें क्योंकि “experience हमेशा bad experience से ही आता है”
  3. सकारात्मक सोचें (Think Positive) , विनम्र रहें एंव दिन की शुरुआत किसी अच्छे कार्य से करें (starting the day with a positive attitude)|
  4. इस दुनिया में नामुनकिन कुछ भी नहीं है – Nothing is Impossible in this world| आत्मविश्वास का सबसे बड़ा दुशमन किसी भी कार्य को करने में असफलता होने का “डर” (Fear of Failure) है एंव डर को हटाना है तो वह कार्य अवश्य करें जिसमें आपको डर लगता है| – Darr ke aage jeet hai
  5. सच बोलें, ईमानदार रहें, धूम्रपान न करें, प्रकृति से जुड़े, अच्छे (Good) कार्य करें , जरुरतमंद की मदद करें (Be Helpful)| क्योंकि ऐसे कार्य आपको सकारात्मक शक्ति (positive power) देते हैं वही दूसरी ओर गलत कार्य एंव बुरी आदतें (Bad Habits) हमारे आत्मविश्वास को गिरा देते हैं|
  6. वह कार्य करें जिसमें आपकी रुचि हो एंव कोशिश करें कि अपने करियर (Career) को उसी दिशा में आगे ले जिसमें आपकी रुचि हो|
  7. वर्तमान में जियें (Live in Present) , सकारात्मक सोचें (Think Positive), अच्छे मित्र बनायें, बच्चों से दोस्तीं करें, आत्मचिंतन करें|
2. स्वतंत्रता (Independence):-
स्वतंत्रता का अर्थ स्वतन्त्र सोच एंव आत्मनिर्भरता से हैं|
“हमारी खुशियों का सबसे बड़ा दुश्मन निर्भरता (Dependency) ही है एंव वर्तमान में खुशियाँ कम होने का कारण निर्भरता का बढ़ना ही है”
“सबसे बड़ा यही रोग क्या कहेंगे लोग (Sabse bada rog kya kahenge log)”:- ज्यादातर लोग कोई भी कार्य करने से पहले कई बार यह सोचते है की वह कार्य करने से लोग उनके बारे में क्या सोचेंगे या क्या कहेंगे और इसलिए वे कोई निर्णय ले ही नहीं पाते एंव सोचते ही रह जाते है एंव समय उनके हाथ से पानी की तरह निकल जाता है| ऐसे लोग बाद में पछताते हैं| इसलिए दोस्तों ज्यादा मत सोचिये जो आपको सही लगे वह कीजिये क्योंकि शायद ही कोई ऐसा कार्य होगा जो सभी लोगों को एक साथ पसंद आये|
अपनी ख़ुशी को खुद नियंत्रण (control) कीजिये:- वर्तमान में ज्यादातर लोगों की खुशियाँ (Happiness) परिस्थितियों पर निर्भर हैं| ऐसे लोग अनुकूल परिस्थिति में खुश (Happy) एंव प्रतिकूल परिस्थियों में दुखी (Sad) हो जाते है| उदाहरण के लिए अगर किसी व्यक्ति का कोई काम बन जाता है तो वह खुश (Happy) एंव काम न बनने पर वह दुखी हो जाता है| दोस्तों हर परिस्थिति में खुश रहें क्योंकि प्रयास करना हमारे हाथ में है लेकिन परिणाम अथवा परिस्थिति हमारे हाथ में नहीं है| परिस्थिति अनुकूल या प्रतिकूल कैसी भी हो सकती है लेकिन उसका response अच्छा ही होना चाहिए क्योंकि response करना हमारे हाथ में है|
आत्मनिर्भर बनें:- दोस्तों निर्भरता ही खुशियों की दुशमन है इसलिए जहाँ तक हो सके दूसरों से अपेक्षाओं कम करें, अपना कार्य स्वंय करें एंव स्वालंबन अपनाएं दूसरों के कर्मों या विचारों से दुखी नहीं होना चाहिए क्योंकि दूसरों के विचार या हमारे नियंत्रण में नहीं है|
“अगर आप उस बातों या परिस्थियों की वजह से दुखी हो जाते है जो आपके नियंत्रण में नहीं है तो इसका परिणाम समय की बर्बादी व भविष्य पछतावा है”
3 वर्तमान में जिएं (Live in Present):-
दोस्तों हमें दिन में 70,000 से 90000 विचार (thoughts) आते है और हमारी सफलता एंव असफलता इसी विचारों की quality (गुणवता) पर निर्भर करती हैं| वैज्ञानिकों के अनुसार ज्यादातर लोगों का 70% से 90% तक समय भूतकाल, भविष्यकाल एंव व्यर्थ की बातें सोचने में चला जाता है| भूतकाल हमें अनुभव देता है एंव भविष्यकाल के लिए हमें planning (योजना) करनी होती है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं की हम अपना सारा समय इसी में खर्च कर दें| दोस्तों हमें वर्तमान में ही रहना चाहिए और इसे best बनाना चाहिए क्योंकि न तो भूतकाल एंव न ही भविष्यकाल पर हमारा नियंत्रण है|
“अगर खुश रहना है एंव सफल होना है तो उस बारे में सोचना बंद कर दें जिस पर हमारा नियंत्रण न हो”
4. मेहनत एंव लगन (Hard work and Focus ):-
दोस्तों किसी विद्वान् ने कहा है की कामयाबी, मेहनत से पहले केवल शब्दकोष में ही मिल सकती है| मेहनत (Hard Work) का अर्थ केवल शारीरिक काम से नहीं है, मेहनत शारीरिक व मानसिक दोनों प्रकार से हो सकती है| अनुभव यह कहता है की मानसिक मेहनत, शारीरिक मेहनत से ज्यादा मूल्यवान होती है|
कुछ लोग लक्ष्य (Target) तो बहुत बड़ा बना देते है लेकिन मेहनत नहीं करते और फिर अपने अपने लक्ष्य को बदलते रहते है| ऐसे लोग केवल योजना(planning) बनाते रह जाते है|
मेहनत व लगन से बड़े से बड़ा मुश्किल कार्य आसान हो जाता है| अगर लक्ष्य को प्राप्त करना है तो बीच में आने वाली बाधाओं को पार करना होगा, मेहनत करनी होगी, बार बार दृढ़ निश्चय से कोशिश करनी होगी|
“असफल लोगों के पास बचने का एकमात्र साधन यह होता है कि वे मुसीबत आने पर अपने लक्ष्य को बदल देते है|”
कुछ लोग ऐसे होते है जो मेहनत तो करते है लेकिन एक बार विफल होने पर निराश होकर कार्य को बीच में ही छोड़ देते है इसलिए मेहनत के साथ साथ लगन व दृढ़ निश्चय (Commitment) का होना भी अति आवश्यक है|
“अगर कोई व्यक्ति बार बार उस कार्य को करने पर भी सफल नहीं हो पा रहा तो इसका मतलब उसका कार्य करने का तरीका गलत है एंव उसे मानसिक मेहनत करने की आवश्यकता है|”
5. व्यवहारकुशलता:-
व्यवहारकुशल व्यक्ति जहाँ भी जाए वह वहां के वातावरण को खुशियों से भर देता है ऐसे लोगों को समाज सम्मान की दृष्टी से देखा जाता है| ऐसे लोग नम्रता व मुस्कराहट (Smile) के साथ व्यवहार करते है एंव हमेशा मदद करने के लिए तैयार रहते है| शिष्टाचार ही सबसे उत्तम सुन्दरता है जिसके बिना व्यक्ति केवल स्वयं तक सीमित हो जाता है एंव समाज उसे “स्वार्थी” नाम का अवार्ड देता है|
“जब आपके मित्रों की संख्या बढने लगे तो यह समझ लीजिये कि आप ने व्यवहारकुशलता का जादू सीख लिया है|”
शिष्टाचारी व्यक्ति किसी भी क्षेत्र भी जाए वहा उनके मित्र बन जाते है जो उसके लिए जरुरत पड़ने पर मर मिटने के लिए तैयार रहते है|
चरित्र  व्यवहारकुशलता की नींव है एंव चरित्रहीन व्यक्ति कभी भी शिष्टाचारी नहीं बन सकता| चरित्र, व्यक्ति की परछाई होती है एंव समाज में व्यक्ति को चहरे से नहीं बल्कि चरित्र से पहचाना जाता है| चरित्र का निर्माण नैतिक मूल्यों, संस्कारों, शिक्षा एंव आदतों से होता है|
व्यवहारकुशल व्यक्तियों की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है की वह हमेशा मदद के लिए तैयार रहते है|
वर्तालाप दक्षता, व्यवहारकुशलता का महत्वपूर्ण हिस्सा है| वाणी में वह शक्ति है जो वातावरण में मिठास घोल कर उसे खुशियों से भर सकती है या उसमे चिंगारी लगा कर आग भड़का सकती है|
“words can change the world” (शब्द संसार बदल सकते है|)
सोच समझ कर बोलना, कम शब्दों में ज्यादा बात कहना, व्यर्थ की बातें न करना, अच्छाई खोजना, तारीफ़ करना, दुसरे की बात को सुनना एंव महत्त्व देना, विनम्र रहना, गलतियाँ स्वीकारना इत्यादि वार्तालाप के कुछ basic नियम है|


इन पांच नियमों में इतनी शक्ति है कि ये आपकी लाइफ बदल देंगे (change your Life) और आपके सपनों को हकीकत में बदलने की शक्ति जगाएंगे| अंत में एक ही बात
“जरूरतमंद की मदद कीजिये क्योंकि क्या पता कल आपको किसी की मदद की जरुरत हो”

जो होता है, अच्छे के लिए होता है

Friends, हमने यह बात कई बार सुनी होगी कि “हमारे साथ जो भी होता है अच्छे के लिए ही होता है – Whatever happens, happens for the Best|” लेकिन हम में से ज्यादात्तर लोग ऐसी बातों को सुन तो लेते है पर उन पर विश्वास (Believe)  नहीं करते|
“हम में से ज्यादात्तर लोगों की समस्या यह नहीं है कि उन्हें अच्छी बातों (Good Thoughts) का ज्ञान नहीं है बल्कि समस्या यह है की उनको अच्छी बातों (Good Thoughts) का ज्ञान होने पर वह उन बातों पर विश्वास नहीं करते|”

HINDI STORYAkbar Birbal Ki Kahani
एक बार शहंशाह अकबर (Akbar) एंव बीरबल (Birbal) शिकार पर गए और वहां पर शिकार करते समय अकबर की अंगुली कट गयी| अकबर को बहुत दर्द हो रहा था| पास में खड़े बीरबल( Birbal ) ने कहा – “कोई बात नहीं शहंशाह, जो भी होता है अच्छे के लिए ही होता है|” अकबर( Akbar ) को बीरबल की इस बात पर क्रोध आ गया और उसने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि बीरबल को महल ले जा कर कारागाह में डाल दिया जाये| सैनिकों ने बीरबल को बंधी बना कर कारागाह में डाल दिया एंव अकबर अकेले ही शिकार पर आगे निकल गए|
रास्ते में आदिवासियों ने जाल बिछा कर शहंशाह अकबर को बंधी बना लिया और अकबर की बली देने के लिए अपने मुखिया के पास ले गए|
जैसे ही मुखिया अकबर की बली चढाने के लिए आगे बढे तो किसी ने देखा कि अकबर की तो अंगुली कटी हुई है अर्थात् वह खंडित है इसलिए उसकी बली नहीं दी जा सकती और उन्होंने अकबर को मुक्त कर दिया| अकबर को अपनी गलती का अहसास हुआ एंव वह तुरंत बीरबल के पास पहुँचा| अकबर (Akbar) ने बीरबल को कारागाह से मुक्त किया एंव उसने बीरबल से माफ़ी मांगी कि उससे बहुत बड़ी भूल हो गयी जो उसने बीरबल (Birbal) जैसे ज्ञानी एंव दूरदृष्टि मित्र को बंधी बनाया| बीरबल ने फिर कहा – जो भी होता है अच्छे के लिए होता है| तो अकबर ने पूछा कि मेरे द्वारा तुमको बंधी बनाने में क्या अच्छा हुआ है?
बीरबल ने कहा, शहंशाह अगर आप मुझे बंधी न बनाते तो में आपके साथ शिकार पर चलता और आदिवासी मेरी बली दे देते| इस तरह बीरबल की यह बात सच हुई की जो भी होता है उसका अंतिम परिणाम अच्छा ही होता है|
दोस्त्तों यह कहानी साबित करती है कि जो होता है, वह अच्छे के लिए ही होता है (Whatever happens, happens for good)| अच्छे का अर्थ उचित एंव न्यायपूर्ण परिणाम से है| दोस्तों अगर आपको ऐसे व्यक्ति के सम्बन्ध में न्याय करने के लिए बुलाया जाये जिसने कोई बुरा कार्य किया है तो आप क्या करेंगे? आप जरूर उसे ऐसी सजा देंगे या ऐसा कार्य करने को बोलेंगे जिससे कि उसको अपनी गलती का अहसास हो जाये और ऐसा करना ही सबसे न्यायपूर्ण एंव उचित होगा| दोस्तों अब प्रश्न उठता है कि सजा देने में उस व्यक्ति का क्या अच्छा हुआ जिसने कोई बुरा कार्य किया था? सजा देने में उस व्यक्ति का अच्छा ही हुआ है क्योंकि अगर उस व्यक्ति को इस बात का अहसास न हो कि उसने कुछ गलत किया है तो शायद वह व्यक्ति अपना सारा जीवन ऐसे ही बुरे कार्यो में व्यर्थ गँवा दे और जब उसके बाल सफ़ेद हो एंव दांत गिरने लगे तो इस बात पर पछताए की काश किसी ने उस वक्त सही रास्ता दिखा दिया होता तो यह जीवन (Life) व्यर्थ न जाता|
“शायद ही इस संसार में कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो मुसीबतों, कठिनाइयों, पराजय, मेहनत एंव गलतियों के बिना सफल हुआ हो| इसलिए हो सकता है कि आपकी मुसीबतें, कठिनाईयां, पराजय एंव गलतियाँ इस बात का सूचक है की आप जल्द ही सफल (Successful) होने वाले है|”
दोस्तों हमारे साथ भी हमेशा अच्छा ही होता है फर्क सिर्फ इस बात का है कि कुछ लोग इस बात पर विश्वास (Believe) करते है एंव हिम्मत नहीं हारते और यहीं दृढ़ निश्चय एंव विश्वास उनको सफलता (success) तक ले जाता है| वहीँ दूसरी ओर कुछ लोग ऐसी बातों पर विश्वास (Believe) नहीं करते एंव जल्द ही निराश (Disappointed) हो जाते है और यही निराशा (Nirasha) उनको सफल (successful) होने से रोकती है|
दोस्तों
निराशा की नींद से जागिये,
स्वंय से बात कीजिये – Talk To Yourself

कल कभी नहीं आएगा  – Tomorrow Never Comes
आगे बढिये, आज आपका है – Go Ahead, Today is Yours
आपको, आप स्वंय के अलावा दूसरा कोई नहीं रोक सकता – No One Can Stop You except Yourself

Tuesday, March 18, 2014

कॉलेज कट्टा ......


कॉलेज जीवनाला आयुष्यातील सोनेरी दिवस म्हंटले जाते. इथेचे तुम्ही लाईफ खरी एन्जोय करता. शाळेतले नियम इथे शिथिल झालेले असतात, नवीन नवीन फॅशनच्या कपड्यांनी शाळेच्या गणवेशाची जागा घेतलेली असते, दिवसाचा बराचसा वेळ क्लासरूम पेक्षा कॅन्टीनमध्ये नाहीतर लाईब्ररीत जात असतो, अनेकवेळा इथेच सर्वांना जीवनातले लॉंग-टर्मचे मित्र मिळतात, काहीना त्यांचं प्रेम इथेच मिळतं वगेर वगेरे. पण इथूनच तुमच्या प्रोफेशनल लाईफचा पाया रचला जातो. त्यामुळे जितकी हि लाईफ एन्जोय करायची असते तेवढीच भविष्याच्या दृष्टीने महत्वाची असते आणि याच व्दिविदा मनस्तीतीत बरीचशी मुले असतात. की, कॉलेज लाईफ एन्जोय करू कि फक्त आभ्यास करू. कारण दोन्ही गोष्टी बॅलन्स करण थोडंस अवघडच असत. फारच थोड्यांनाच ते जमत. मी माझ्या कॉलेजच्या जीवनात अणूभवलेल्या काही मजेशीर गोष्टी म्हणजे मित्राला त्याच्या आवडत्या मुलीने नुसते त्याच्याकडे पाहून हसलेल्याबद्दलची पार्टी घेणे, लेक्चरला एका वेळेस दोन-चार मित्रांची हजेरी लावने, क्लास मधल्या मुलींची वही पाहून काहीही न समजले तरी असायमेंट पूर्ण करणे. लेक्चर चालू असताना फ़क़्त तिच्याकडेच पाहणे, तिच्याकडून घेतल्येल्या वहीत तिच्या वहीतील सुंदर अक्षर पाहून हे इतकं सुंदर अक्षर तुझ्यासाठीच काढलंय रेअसा समज करून घेणे, तिच्या डोळ्यातील भाव वाचायचा प्रयत्न करणे, तिने घातलेला ड्रेस हा फ़क़्त मला तो रंग आवडतो म्हणूनच असा समजून घेण, तिने तिच्यात जाणीवपूर्वक केलेले बदल समजावून घेणे, उगाचच काही नसताना दोघात काहीतरी चाललेय अशी अफवा उठवयाची, आदल्या दिवशी बघितलेल्या क्रिकेट मॅचवर वर्गात सगळे मिळून गप्पा मारणे, मित्रांबरोबर कट्ट्यावर बसून वेळ घालवणे, चॉकलेट डे ला सगळ्यांना चॉकलेट देणे, फ्रेंडशिप डे ला कुठल्याही मुलीकडे बिनधास्त फ्रेंडशिप मागायची, वेलनटाइन डे ला एकट्यातच का होईना तिला प्रपोज करणे, आपल्या वर्गाने कॉलेजची मॅच जिंकल्यावर, ग्यादरिंगला बेधुंद होऊन नाचणे, traditional डे ला मावळ्यांचा, पेशव्यांचा वगेरे ड्रेस घालून नवीन इतिहास घडवणे, मित्रांच्या वाढदिवसाला रात्री बाराला उठून SMS पाठवणे, पुरं सेमिस्टर झोपा काढून ऐन exam च्या वेळेस रात्रभर जागून अभ्यास करणे, पेपर लिहिताना सुद्धा तिला मागे वळून पाहणे, तिच्या तोंडावरचे भाव आपल्यात सामावून घेणे, शेवटचा पपेर झाल्यावर कॉलेजभर दंगा धुडगूस घालणे, एवढं करूनही फर्स्टक्लास मध्ये पास होणे. ह्या सर्व गोष्टी तुम्ही पण अनुभवलेल्या असतीलच. कॉलेज, म्हटलं की डोळ्यासमोर येते ती कॉलेजची इमारत, आपला वर्ग, वर्गातील बेंच, ब्लॅकबोर्ड, कॉलेजचे कॅन्टीन, पार्किंग लॉट, लॅब, लाईब्ररी वगैरे वगैरे. आणि “ती. पण कॉलेजची शान म्हणजे आपल्या सर्वांच्या हक्काचा कॉलेज कट्टा. जसा बाजार भरतो तसा हा कट्टा पण भरतो. गोंगाट, गोंधळ, वादावादी, भांडणं, प्रेम, मदतीचा हात, इमोशनल ड्रामा याकरिता कॉलेजचा कट्टा भलताच प्रसिद्ध आहे. पण हा कुठे भरतो माहीत आहे? कॉलेजच्या ग्राऊंडवर, आपल्या वर्गात ऑफ लेक्चरला, वर्गाच्या बाकावर किवा कॉलेज कॅन्टीन मध्ये. बोलें तो कॉलेज कट्टा भरायला कुठलाच मुहूर्त लागत नाही. कॉलेजमधील सगळ्यात आवडती जागा कोणती, असा प्रश्न विचारला, तर कोणताही विद्यार्थी कट्टा असेच उत्तर देईल. आमचा कॉलेज कट्टा म्हणजे कॉलेजच्या गेटच्या बाजूला असलेल्या गार्डनमध्ये मांडून ठेवलेले बेंच. त्या कट्ट्यामध्ये असे असतेच काय, की ज्यामुळे तो इतका लोकप्रिय व्हावा? याचे उत्तर बहुधा विद्यार्थीच देऊ शकतील. मुलांच्या जडणघडणीतला, अडीअडचणींचा, गप्पांचा, मजा-मस्तीचा महत्त्वाचा साक्षीदार कट्टाच असतो. याच कट्ट्यावर गप्पांचे फड रंगतात, भांडणंही रंगतात, मग समजुतींचा खेळही तिथेच रंगतो. कॉलेजच्या कट्ट्यांवरच पिकनिकचे प्लॅनिंग होते, पार्टीची तयारीही तिथलीच. मग हळूहळू कट्टा ही ओळख बनून जाते. कॅन्टीन मध्ये हरवण्याची मजा, लेक्चरला मारलेल्या दांड्या, गंमतीने काढलेल्या खोड्या, कारण नसताना केलेली भांडण, एकमेकांना चिडविणे, पिकनिक चे किस्से हे सर्व या कट्याने पहिलेले असते. हा कट्टा निर्जीव असला तरी त्यावर घालवलेले क्षण मात्र जिवंत असतात. कॉलेज कट्ट्यावरच्या गोष्टी पासून कुणी सुटले असे कधी झाले नाही. नव्या विद्यार्थ्याच्या चर्चे पासून ते एखाद्या प्रेमप्रकरणाचा झालेला किस्सा, राज ठाकरेंपासून ते अभ्यासाच्या चर्चा कट्ट्यावरच रंगत असतात. याच कट्यावर मला माझ्या वर्गातील मुलांची प्रेमप्रकरणे समजली. इथे प्रतेकजण कुणाच्या-ना-कुणाच्या नावाने ओळखला जाई. मी म्हणजे या सार्‍यांचा एक व्यासपीठच बनलो होतो. प्रत्येकजण आपली प्रत्येक गोष्ट माझ्याबरोबर शेअर करीत असे. त्याशिवाय आमचा एकही दिवस गेला नाही. असाच एखादा प्रसंग आला की हसता-हसता एक-मेकांना टाळी देण्यात मजा काही औरच असते. येवढं असूनही मी मात्र या सगळ्यात खूप वेगळा होतो. मित्रांबरोबर गप्पा मारता-मारता नकळत कशाची तरी जाणीव व्हायची, कोणाचीतरी चाहूल लगायची, मग मित्रांना कासातरी कटवत, “हा आलो रे जाऊनअसं म्हणत या कट्ट्यावरून मागे फिरायचो,“ ते कशामुळे? ते काय होत? मला माहीत नाही”. पण ते जेकाही होतं खूप चांगलं होत, कारण त्यामूळेच चांगलं काय? वाईट काय? याची जाणीव मात्र नेहमी व्हायची. आता तुम्ही म्हणाल कि कॉलेज कट्ट्यावर फक्त टिंगल टवाळ्याच करतोस का? तर असे नाही हा.. अभ्यास देखील करतो. वर्षभर गप्पांनी रंगलेला कट्टा परीक्षेच्या काळात नोटस, बुक्स, झेरोक्स आणि विद्यार्थी अश्यांनी कॉलेज कट्टा अभ्यासमय होऊन जातो. एखादा पक्षी ज्याप्रमाणे झाडाच्या सावलीत विसाव्यासाठी येत असतो. त्याचप्रमाणे विद्यार्थी या कट्ट्यावर एकत्र येत असतात. आपली सर्व सुख दुख इथेच एकमेकांना सांगतात. वर्षानुवर्ष एकच कट्टा असतो. मात्र त्यावर असणारे कॉलेज कट्टेकरी वर्षानुवर्ष बदलत असतात. परंतु विषय मात्र तेच असतात. हा असा कट्टा प्रत्येकाच्या जिव्हाळ्याचा असतो. कॉलेज आमची दुनिया, कट्टा आमचा पत्ता या पत्त्यावरती आमचा क्लास, आमचा श्वास, मैत्रीची सुरवात, दुष्मनीचा दावा कट्ट्यावरतीच. बोलतो आम्ही, भांडतो आम्ही कट्ट्यावरती, नडतो आम्ही, तोडतो आम्ही कट्ट्यावरती, प्रेमात पडतो प्रेमात वाहतो कट्ट्यावरती मस्तीत राहातो नादात जगतो कट्यावरती, जीवन फुलवतो आयुष्य सजवतो कट्ट्यावरती कॉलेज कट्टा, माझा कट्टा, आमचा कट्टा, नाद हा कट्याचा, कट्ट्यावरचा नाद आमचा. परीक्षेची नोटीस ऐकतो कट्ट्यावरतीच. लेक्चर ऑफ कळते कट्ट्यावरतीच, रिझल्ट उघडतात कट्ट्यावरती, इज्जत निघते, इज्जत मिळते कट्ट्यावरती. नापास होउन यायला इथे नसते कधी बंदी, वेगळी भाषा असते इथली वेगळे असतात कायदे, सिनीअर्स बरोबर चकाट्या पिटायचे असतात इथे फ़ायदे, अभ्यासाच्या विषयाला मात्र इथे नेहेमीच बंदी असते हिरवळीचा विषय मात्र इथे सगळ्यांच्या जीव्हाळ्याचा. प्रत्येक कॉलेजबाहेर एक कट्टा असतो कॉलेजला सुट्टी लागल्यावर मात्र हा कट्टा एकटाच पडतो. या कट्ट्याच्या जगातून बाहेर पडायची इच्छा का होत नाही? याचे उत्तर मला सापडलेले नाही. आणि सापडूही नाही शकत असचं वाटत. त्या कट्ट्याने दिलेल्या बऱ्यावाईट अनुभवांची शिदोरी घेऊन भविष्यात पाऊल ठेवायला विद्यार्थी तयार होतात. मग सुट्टीत कधीतरी त्या कट्ट्याची आठवण झाली, की मित्रांना फोनाफोनी होते आणि गप्पांच्या मैफलीत कधी त्या कट्ट्यावर जाऊन बसतो, ते कळतही नाही. म्हणून म्हणतो आयुष्यात एकदा तरी हा कॉलेज कट्टा अनुभवावाच. नाहीतर हे दिवस निघून गेल्यावर तुम्ही नक्की म्हणाल की, यार फक्त करियरचा विचार करताना कॉलेज लाइफ कुठे तरी एन्जोय करायच राहून गेल कि काय? मात्र सेमिस्टरचा रिझल्ट बघितल्यावर आमच्या मनाची अवस्था काहीशी अशी असते. ” आपला मित्र नापास झाल्यास जरा दु:ख होत आणि मित्र फर्स्ट क्लास मध्ये पास झाल्यास जरा जास्तच दु:ख होत .



Vaibhav V. Kudtarkar
S.Y.B.A.,
SRM_KDL-2014-15

Saturday, August 5, 2017

जिन्दगी

#जिन्दगी कभी दुःख नही देती बल्कि जिना सिखाती है...
बस ये इंसान है जो सबका मजाक उडाता है....
ये दुनिया है जो नफ़रत सिखाती है...
बस जिंदगी सिखाती हैं ...उसे अपना लेना चाहिए....
जिंदगी हमेशा जीना सिखाती है।
@vk......😊

Saturday, January 10, 2015

New Beginning :- एक नयी शुरुआत – Rules of Success

दोस्तों जीवन (Life) में हमारे पास अपने लिए मात्र 3500 दिन (9 वर्ष व 6 महीने) ही होते है !
वर्ल्ड बैंक ने एक इन्सान की औसत आयु 78 वर्ष मानकर यह आकलन किया है जिसके अनुसार हमारे पास अपने लिए मात्र 9 वर्ष व 6 महीने ही होते है| इस आकलन के अनुसार औसतन 29 वर्ष सोने में, 3-4 वर्ष शिक्षा में, 10-12 वर्ष रोजगार में, 9-10 वर्ष मनोरंजन में, 15-18 वर्ष­ अन्य रोजमरा के कामों में जैसे खाना पीना, यात्रा, नित्य कर्म, घर के काम इत्यादि में खर्च हो जाते है| इस तरह हमारे पास अपने सपनों (Dreams) को पूरा करने व कुछ कर दिखाने के लिए मात्र 3500 दिन अथवा 84,000 घंटे ही होते है|
“संसार की सबसे मूल्यवान वस्तु समय ही है”
लेकिन वर्तमान में ज्यादातर लोग निराशामय जिंदगी (Life) जी रहे है और वे इंतजार कर रहे होते है कि उनके जीवन में कोई चमत्कार होगा, जो उनकी निराशामय जिंदगी को बदल देगा| दोस्तों वह चमत्कार आज व अभी से शुरू होगा और उस चमत्कार को करने वाले व्यक्ति आप ही है, क्योंकि उस चमत्कार को आप के अलावा कोई दूसरा व्यक्ति नहीं कर सकता|
इस शुरुआत के लिए हमें अपनी सोच व मान्यताओ (beliefs) को बदलना होगा, क्योंकि
“हमारे साथ वही होता है जो हम मानते है|”
Friends, वैज्ञानिकों के अनुसार भौंरे (Bumblebee) का शरीर बहुत भारी होता है, इसलिए विज्ञान के नियमो के अनुसार वह उड़ नहीं सकता| लेकिन भौंरे को इस बात का पता नहीं होता एंव वह यह मानता है की वह उड़ सकता है इसलिए वह उड़ पाता है|
सबसे पहले हमें इस गलत धारणा (Wrong Belief) को बदलना होगा कि हमारे साथ वही होता है जो भाग्य (Bhagya) में लिखा होता है| क्योंकि ऐसा होता तो आज हम ईश्वर (God) की पूजा न कर रहे होते बल्कि उन्हें बदुआएं दे रहे होते|
दोस्तों हमारे साथ जो कुछ भी होता है उसके जिम्मेदार हम स्वंय होते है (We are responsible for What we are) इसलिए खुश रहना या ना रहना हम पर ही निर्भर (depend) करता है|
“भगवान उसी की मदद करते है जो अपनी मदद खुद करता है”
“God helps those who help themselves”
अगर कोई व्यक्ति यह सोचता है की हमारे साथ जो कुछ भी होता है, वह हमारे हाथ में नहीं है तो वह व्यक्ति या तो इस गलत धारणा (Wrong Belief) को बदल दे या आगे इस लेख (Hindi Article) को न पढे|
जीवन के नियम :- Rules of life
दोस्तों हम एक नयी शुरुआत करने जा रहे है और इसके लिए हमें कुछ नियमो का पालन करना होगा| ये नियम आपकी जिंदगी बदल देंगे ( Rules That can Change Your Life in Hindi) :-

  1. आत्मविश्वास (Self Confidence) :-
आत्मविश्वास से आशय “स्वंय पर विश्वास एंव नियंत्रण” (Believe in Yourself) से है | दोस्तों हमारे जीवन में आत्मविश्वास (Self Confidence) का होना उतना ही आवश्यक है जितना किसी फूल (Flower) में खुशबू (सुगंध) का होना, आत्मविश्वास (Self Confidence) के बगैर हमारी जिंदगी एक जिन्दा लाश के समान हो जाती है| कोई भी व्यक्ति कितना भी प्रतिभाशाली क्यों न हो वह आत्मविश्वास के बिना कुछ नहीं कर सकता| आत्मविश्वास ही सफलता (Success) की नींव है, आत्मविश्वास की कमी के कारण व्यक्ति अपने द्वारा किये गए कार्य पर संदेह करता है| आत्मविश्वास (Self Confidence) उसी व्यक्ति के पास होता है जो स्वंय से संतुष्ट होता है एंव जिसके पास दृड़ निश्चय, मेहनत (Hardwork) व लगन (Focused), साहस (Fearless ) , वचनबद्धता (Commitment) आदि संस्कारों की सम्पति होती है|
आत्मविश्वास कैसे बढाएं:- How To Improve Self Confidence In – Hindi

  1. स्वंय पर विश्वास रखें (Believe in Yourself), लक्ष्य बनायें (make smart goals) एंव उन्हें पूरा करने के लिए वचनबद्ध रहें| जब आप अपने द्वारा बनाये गए लक्ष्य (Goals) को पूरा करते है तो यह आपके आत्मविश्वास (Self Confidence) को कई गुना बढ़ा देता है|
  2. खुश रहें (Be Happy), खुद को प्रेरित करें (Motivate Yourself), असफलता (Failure) से दुखी न होकर उससे सीख लें क्योंकि “experience हमेशा bad experience से ही आता है”
  3. सकारात्मक सोचें (Think Positive) , विनम्र रहें एंव दिन की शुरुआत किसी अच्छे कार्य से करें (starting the day with a positive attitude)|
  4. इस दुनिया में नामुनकिन कुछ भी नहीं है – Nothing is Impossible in this world| आत्मविश्वास का सबसे बड़ा दुशमन किसी भी कार्य को करने में असफलता होने का “डर” (Fear of Failure) है एंव डर को हटाना है तो वह कार्य अवश्य करें जिसमें आपको डर लगता है| – Darr ke aage jeet hai
  5. सच बोलें, ईमानदार रहें, धूम्रपान न करें, प्रकृति से जुड़े, अच्छे (Good) कार्य करें , जरुरतमंद की मदद करें (Be Helpful)| क्योंकि ऐसे कार्य आपको सकारात्मक शक्ति (positive power) देते हैं वही दूसरी ओर गलत कार्य एंव बुरी आदतें (Bad Habits) हमारे आत्मविश्वास को गिरा देते हैं|
  6. वह कार्य करें जिसमें आपकी रुचि हो एंव कोशिश करें कि अपने करियर (Career) को उसी दिशा में आगे ले जिसमें आपकी रुचि हो|
  7. वर्तमान में जियें (Live in Present) , सकारात्मक सोचें (Think Positive), अच्छे मित्र बनायें, बच्चों से दोस्तीं करें, आत्मचिंतन करें|
2. स्वतंत्रता (Independence):-
स्वतंत्रता का अर्थ स्वतन्त्र सोच एंव आत्मनिर्भरता से हैं|
“हमारी खुशियों का सबसे बड़ा दुश्मन निर्भरता (Dependency) ही है एंव वर्तमान में खुशियाँ कम होने का कारण निर्भरता का बढ़ना ही है”
“सबसे बड़ा यही रोग क्या कहेंगे लोग (Sabse bada rog kya kahenge log)”:- ज्यादातर लोग कोई भी कार्य करने से पहले कई बार यह सोचते है की वह कार्य करने से लोग उनके बारे में क्या सोचेंगे या क्या कहेंगे और इसलिए वे कोई निर्णय ले ही नहीं पाते एंव सोचते ही रह जाते है एंव समय उनके हाथ से पानी की तरह निकल जाता है| ऐसे लोग बाद में पछताते हैं| इसलिए दोस्तों ज्यादा मत सोचिये जो आपको सही लगे वह कीजिये क्योंकि शायद ही कोई ऐसा कार्य होगा जो सभी लोगों को एक साथ पसंद आये|
अपनी ख़ुशी को खुद नियंत्रण (control) कीजिये:- वर्तमान में ज्यादातर लोगों की खुशियाँ (Happiness) परिस्थितियों पर निर्भर हैं| ऐसे लोग अनुकूल परिस्थिति में खुश (Happy) एंव प्रतिकूल परिस्थियों में दुखी (Sad) हो जाते है| उदाहरण के लिए अगर किसी व्यक्ति का कोई काम बन जाता है तो वह खुश (Happy) एंव काम न बनने पर वह दुखी हो जाता है| दोस्तों हर परिस्थिति में खुश रहें क्योंकि प्रयास करना हमारे हाथ में है लेकिन परिणाम अथवा परिस्थिति हमारे हाथ में नहीं है| परिस्थिति अनुकूल या प्रतिकूल कैसी भी हो सकती है लेकिन उसका response अच्छा ही होना चाहिए क्योंकि response करना हमारे हाथ में है|
आत्मनिर्भर बनें:- दोस्तों निर्भरता ही खुशियों की दुशमन है इसलिए जहाँ तक हो सके दूसरों से अपेक्षाओं कम करें, अपना कार्य स्वंय करें एंव स्वालंबन अपनाएं दूसरों के कर्मों या विचारों से दुखी नहीं होना चाहिए क्योंकि दूसरों के विचार या हमारे नियंत्रण में नहीं है|
“अगर आप उस बातों या परिस्थियों की वजह से दुखी हो जाते है जो आपके नियंत्रण में नहीं है तो इसका परिणाम समय की बर्बादी व भविष्य पछतावा है”
3 वर्तमान में जिएं (Live in Present):-
दोस्तों हमें दिन में 70,000 से 90000 विचार (thoughts) आते है और हमारी सफलता एंव असफलता इसी विचारों की quality (गुणवता) पर निर्भर करती हैं| वैज्ञानिकों के अनुसार ज्यादातर लोगों का 70% से 90% तक समय भूतकाल, भविष्यकाल एंव व्यर्थ की बातें सोचने में चला जाता है| भूतकाल हमें अनुभव देता है एंव भविष्यकाल के लिए हमें planning (योजना) करनी होती है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं की हम अपना सारा समय इसी में खर्च कर दें| दोस्तों हमें वर्तमान में ही रहना चाहिए और इसे best बनाना चाहिए क्योंकि न तो भूतकाल एंव न ही भविष्यकाल पर हमारा नियंत्रण है|
“अगर खुश रहना है एंव सफल होना है तो उस बारे में सोचना बंद कर दें जिस पर हमारा नियंत्रण न हो”
4. मेहनत एंव लगन (Hard work and Focus ):-
दोस्तों किसी विद्वान् ने कहा है की कामयाबी, मेहनत से पहले केवल शब्दकोष में ही मिल सकती है| मेहनत (Hard Work) का अर्थ केवल शारीरिक काम से नहीं है, मेहनत शारीरिक व मानसिक दोनों प्रकार से हो सकती है| अनुभव यह कहता है की मानसिक मेहनत, शारीरिक मेहनत से ज्यादा मूल्यवान होती है|
कुछ लोग लक्ष्य (Target) तो बहुत बड़ा बना देते है लेकिन मेहनत नहीं करते और फिर अपने अपने लक्ष्य को बदलते रहते है| ऐसे लोग केवल योजना(planning) बनाते रह जाते है|
मेहनत व लगन से बड़े से बड़ा मुश्किल कार्य आसान हो जाता है| अगर लक्ष्य को प्राप्त करना है तो बीच में आने वाली बाधाओं को पार करना होगा, मेहनत करनी होगी, बार बार दृढ़ निश्चय से कोशिश करनी होगी|
“असफल लोगों के पास बचने का एकमात्र साधन यह होता है कि वे मुसीबत आने पर अपने लक्ष्य को बदल देते है|”
कुछ लोग ऐसे होते है जो मेहनत तो करते है लेकिन एक बार विफल होने पर निराश होकर कार्य को बीच में ही छोड़ देते है इसलिए मेहनत के साथ साथ लगन व दृढ़ निश्चय (Commitment) का होना भी अति आवश्यक है|
“अगर कोई व्यक्ति बार बार उस कार्य को करने पर भी सफल नहीं हो पा रहा तो इसका मतलब उसका कार्य करने का तरीका गलत है एंव उसे मानसिक मेहनत करने की आवश्यकता है|”
5. व्यवहारकुशलता:-
व्यवहारकुशल व्यक्ति जहाँ भी जाए वह वहां के वातावरण को खुशियों से भर देता है ऐसे लोगों को समाज सम्मान की दृष्टी से देखा जाता है| ऐसे लोग नम्रता व मुस्कराहट (Smile) के साथ व्यवहार करते है एंव हमेशा मदद करने के लिए तैयार रहते है| शिष्टाचार ही सबसे उत्तम सुन्दरता है जिसके बिना व्यक्ति केवल स्वयं तक सीमित हो जाता है एंव समाज उसे “स्वार्थी” नाम का अवार्ड देता है|
“जब आपके मित्रों की संख्या बढने लगे तो यह समझ लीजिये कि आप ने व्यवहारकुशलता का जादू सीख लिया है|”
शिष्टाचारी व्यक्ति किसी भी क्षेत्र भी जाए वहा उनके मित्र बन जाते है जो उसके लिए जरुरत पड़ने पर मर मिटने के लिए तैयार रहते है|
चरित्र  व्यवहारकुशलता की नींव है एंव चरित्रहीन व्यक्ति कभी भी शिष्टाचारी नहीं बन सकता| चरित्र, व्यक्ति की परछाई होती है एंव समाज में व्यक्ति को चहरे से नहीं बल्कि चरित्र से पहचाना जाता है| चरित्र का निर्माण नैतिक मूल्यों, संस्कारों, शिक्षा एंव आदतों से होता है|
व्यवहारकुशल व्यक्तियों की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है की वह हमेशा मदद के लिए तैयार रहते है|
वर्तालाप दक्षता, व्यवहारकुशलता का महत्वपूर्ण हिस्सा है| वाणी में वह शक्ति है जो वातावरण में मिठास घोल कर उसे खुशियों से भर सकती है या उसमे चिंगारी लगा कर आग भड़का सकती है|
“words can change the world” (शब्द संसार बदल सकते है|)
सोच समझ कर बोलना, कम शब्दों में ज्यादा बात कहना, व्यर्थ की बातें न करना, अच्छाई खोजना, तारीफ़ करना, दुसरे की बात को सुनना एंव महत्त्व देना, विनम्र रहना, गलतियाँ स्वीकारना इत्यादि वार्तालाप के कुछ basic नियम है|


इन पांच नियमों में इतनी शक्ति है कि ये आपकी लाइफ बदल देंगे (change your Life) और आपके सपनों को हकीकत में बदलने की शक्ति जगाएंगे| अंत में एक ही बात
“जरूरतमंद की मदद कीजिये क्योंकि क्या पता कल आपको किसी की मदद की जरुरत हो”

जो होता है, अच्छे के लिए होता है

Friends, हमने यह बात कई बार सुनी होगी कि “हमारे साथ जो भी होता है अच्छे के लिए ही होता है – Whatever happens, happens for the Best|” लेकिन हम में से ज्यादात्तर लोग ऐसी बातों को सुन तो लेते है पर उन पर विश्वास (Believe)  नहीं करते|
“हम में से ज्यादात्तर लोगों की समस्या यह नहीं है कि उन्हें अच्छी बातों (Good Thoughts) का ज्ञान नहीं है बल्कि समस्या यह है की उनको अच्छी बातों (Good Thoughts) का ज्ञान होने पर वह उन बातों पर विश्वास नहीं करते|”

HINDI STORYAkbar Birbal Ki Kahani
एक बार शहंशाह अकबर (Akbar) एंव बीरबल (Birbal) शिकार पर गए और वहां पर शिकार करते समय अकबर की अंगुली कट गयी| अकबर को बहुत दर्द हो रहा था| पास में खड़े बीरबल( Birbal ) ने कहा – “कोई बात नहीं शहंशाह, जो भी होता है अच्छे के लिए ही होता है|” अकबर( Akbar ) को बीरबल की इस बात पर क्रोध आ गया और उसने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि बीरबल को महल ले जा कर कारागाह में डाल दिया जाये| सैनिकों ने बीरबल को बंधी बना कर कारागाह में डाल दिया एंव अकबर अकेले ही शिकार पर आगे निकल गए|
रास्ते में आदिवासियों ने जाल बिछा कर शहंशाह अकबर को बंधी बना लिया और अकबर की बली देने के लिए अपने मुखिया के पास ले गए|
जैसे ही मुखिया अकबर की बली चढाने के लिए आगे बढे तो किसी ने देखा कि अकबर की तो अंगुली कटी हुई है अर्थात् वह खंडित है इसलिए उसकी बली नहीं दी जा सकती और उन्होंने अकबर को मुक्त कर दिया| अकबर को अपनी गलती का अहसास हुआ एंव वह तुरंत बीरबल के पास पहुँचा| अकबर (Akbar) ने बीरबल को कारागाह से मुक्त किया एंव उसने बीरबल से माफ़ी मांगी कि उससे बहुत बड़ी भूल हो गयी जो उसने बीरबल (Birbal) जैसे ज्ञानी एंव दूरदृष्टि मित्र को बंधी बनाया| बीरबल ने फिर कहा – जो भी होता है अच्छे के लिए होता है| तो अकबर ने पूछा कि मेरे द्वारा तुमको बंधी बनाने में क्या अच्छा हुआ है?
बीरबल ने कहा, शहंशाह अगर आप मुझे बंधी न बनाते तो में आपके साथ शिकार पर चलता और आदिवासी मेरी बली दे देते| इस तरह बीरबल की यह बात सच हुई की जो भी होता है उसका अंतिम परिणाम अच्छा ही होता है|
दोस्त्तों यह कहानी साबित करती है कि जो होता है, वह अच्छे के लिए ही होता है (Whatever happens, happens for good)| अच्छे का अर्थ उचित एंव न्यायपूर्ण परिणाम से है| दोस्तों अगर आपको ऐसे व्यक्ति के सम्बन्ध में न्याय करने के लिए बुलाया जाये जिसने कोई बुरा कार्य किया है तो आप क्या करेंगे? आप जरूर उसे ऐसी सजा देंगे या ऐसा कार्य करने को बोलेंगे जिससे कि उसको अपनी गलती का अहसास हो जाये और ऐसा करना ही सबसे न्यायपूर्ण एंव उचित होगा| दोस्तों अब प्रश्न उठता है कि सजा देने में उस व्यक्ति का क्या अच्छा हुआ जिसने कोई बुरा कार्य किया था? सजा देने में उस व्यक्ति का अच्छा ही हुआ है क्योंकि अगर उस व्यक्ति को इस बात का अहसास न हो कि उसने कुछ गलत किया है तो शायद वह व्यक्ति अपना सारा जीवन ऐसे ही बुरे कार्यो में व्यर्थ गँवा दे और जब उसके बाल सफ़ेद हो एंव दांत गिरने लगे तो इस बात पर पछताए की काश किसी ने उस वक्त सही रास्ता दिखा दिया होता तो यह जीवन (Life) व्यर्थ न जाता|
“शायद ही इस संसार में कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो मुसीबतों, कठिनाइयों, पराजय, मेहनत एंव गलतियों के बिना सफल हुआ हो| इसलिए हो सकता है कि आपकी मुसीबतें, कठिनाईयां, पराजय एंव गलतियाँ इस बात का सूचक है की आप जल्द ही सफल (Successful) होने वाले है|”
दोस्तों हमारे साथ भी हमेशा अच्छा ही होता है फर्क सिर्फ इस बात का है कि कुछ लोग इस बात पर विश्वास (Believe) करते है एंव हिम्मत नहीं हारते और यहीं दृढ़ निश्चय एंव विश्वास उनको सफलता (success) तक ले जाता है| वहीँ दूसरी ओर कुछ लोग ऐसी बातों पर विश्वास (Believe) नहीं करते एंव जल्द ही निराश (Disappointed) हो जाते है और यही निराशा (Nirasha) उनको सफल (successful) होने से रोकती है|
दोस्तों
निराशा की नींद से जागिये,
स्वंय से बात कीजिये – Talk To Yourself

कल कभी नहीं आएगा  – Tomorrow Never Comes
आगे बढिये, आज आपका है – Go Ahead, Today is Yours
आपको, आप स्वंय के अलावा दूसरा कोई नहीं रोक सकता – No One Can Stop You except Yourself

Tuesday, March 18, 2014

कॉलेज कट्टा ......


कॉलेज जीवनाला आयुष्यातील सोनेरी दिवस म्हंटले जाते. इथेचे तुम्ही लाईफ खरी एन्जोय करता. शाळेतले नियम इथे शिथिल झालेले असतात, नवीन नवीन फॅशनच्या कपड्यांनी शाळेच्या गणवेशाची जागा घेतलेली असते, दिवसाचा बराचसा वेळ क्लासरूम पेक्षा कॅन्टीनमध्ये नाहीतर लाईब्ररीत जात असतो, अनेकवेळा इथेच सर्वांना जीवनातले लॉंग-टर्मचे मित्र मिळतात, काहीना त्यांचं प्रेम इथेच मिळतं वगेर वगेरे. पण इथूनच तुमच्या प्रोफेशनल लाईफचा पाया रचला जातो. त्यामुळे जितकी हि लाईफ एन्जोय करायची असते तेवढीच भविष्याच्या दृष्टीने महत्वाची असते आणि याच व्दिविदा मनस्तीतीत बरीचशी मुले असतात. की, कॉलेज लाईफ एन्जोय करू कि फक्त आभ्यास करू. कारण दोन्ही गोष्टी बॅलन्स करण थोडंस अवघडच असत. फारच थोड्यांनाच ते जमत. मी माझ्या कॉलेजच्या जीवनात अणूभवलेल्या काही मजेशीर गोष्टी म्हणजे मित्राला त्याच्या आवडत्या मुलीने नुसते त्याच्याकडे पाहून हसलेल्याबद्दलची पार्टी घेणे, लेक्चरला एका वेळेस दोन-चार मित्रांची हजेरी लावने, क्लास मधल्या मुलींची वही पाहून काहीही न समजले तरी असायमेंट पूर्ण करणे. लेक्चर चालू असताना फ़क़्त तिच्याकडेच पाहणे, तिच्याकडून घेतल्येल्या वहीत तिच्या वहीतील सुंदर अक्षर पाहून हे इतकं सुंदर अक्षर तुझ्यासाठीच काढलंय रेअसा समज करून घेणे, तिच्या डोळ्यातील भाव वाचायचा प्रयत्न करणे, तिने घातलेला ड्रेस हा फ़क़्त मला तो रंग आवडतो म्हणूनच असा समजून घेण, तिने तिच्यात जाणीवपूर्वक केलेले बदल समजावून घेणे, उगाचच काही नसताना दोघात काहीतरी चाललेय अशी अफवा उठवयाची, आदल्या दिवशी बघितलेल्या क्रिकेट मॅचवर वर्गात सगळे मिळून गप्पा मारणे, मित्रांबरोबर कट्ट्यावर बसून वेळ घालवणे, चॉकलेट डे ला सगळ्यांना चॉकलेट देणे, फ्रेंडशिप डे ला कुठल्याही मुलीकडे बिनधास्त फ्रेंडशिप मागायची, वेलनटाइन डे ला एकट्यातच का होईना तिला प्रपोज करणे, आपल्या वर्गाने कॉलेजची मॅच जिंकल्यावर, ग्यादरिंगला बेधुंद होऊन नाचणे, traditional डे ला मावळ्यांचा, पेशव्यांचा वगेरे ड्रेस घालून नवीन इतिहास घडवणे, मित्रांच्या वाढदिवसाला रात्री बाराला उठून SMS पाठवणे, पुरं सेमिस्टर झोपा काढून ऐन exam च्या वेळेस रात्रभर जागून अभ्यास करणे, पेपर लिहिताना सुद्धा तिला मागे वळून पाहणे, तिच्या तोंडावरचे भाव आपल्यात सामावून घेणे, शेवटचा पपेर झाल्यावर कॉलेजभर दंगा धुडगूस घालणे, एवढं करूनही फर्स्टक्लास मध्ये पास होणे. ह्या सर्व गोष्टी तुम्ही पण अनुभवलेल्या असतीलच. कॉलेज, म्हटलं की डोळ्यासमोर येते ती कॉलेजची इमारत, आपला वर्ग, वर्गातील बेंच, ब्लॅकबोर्ड, कॉलेजचे कॅन्टीन, पार्किंग लॉट, लॅब, लाईब्ररी वगैरे वगैरे. आणि “ती. पण कॉलेजची शान म्हणजे आपल्या सर्वांच्या हक्काचा कॉलेज कट्टा. जसा बाजार भरतो तसा हा कट्टा पण भरतो. गोंगाट, गोंधळ, वादावादी, भांडणं, प्रेम, मदतीचा हात, इमोशनल ड्रामा याकरिता कॉलेजचा कट्टा भलताच प्रसिद्ध आहे. पण हा कुठे भरतो माहीत आहे? कॉलेजच्या ग्राऊंडवर, आपल्या वर्गात ऑफ लेक्चरला, वर्गाच्या बाकावर किवा कॉलेज कॅन्टीन मध्ये. बोलें तो कॉलेज कट्टा भरायला कुठलाच मुहूर्त लागत नाही. कॉलेजमधील सगळ्यात आवडती जागा कोणती, असा प्रश्न विचारला, तर कोणताही विद्यार्थी कट्टा असेच उत्तर देईल. आमचा कॉलेज कट्टा म्हणजे कॉलेजच्या गेटच्या बाजूला असलेल्या गार्डनमध्ये मांडून ठेवलेले बेंच. त्या कट्ट्यामध्ये असे असतेच काय, की ज्यामुळे तो इतका लोकप्रिय व्हावा? याचे उत्तर बहुधा विद्यार्थीच देऊ शकतील. मुलांच्या जडणघडणीतला, अडीअडचणींचा, गप्पांचा, मजा-मस्तीचा महत्त्वाचा साक्षीदार कट्टाच असतो. याच कट्ट्यावर गप्पांचे फड रंगतात, भांडणंही रंगतात, मग समजुतींचा खेळही तिथेच रंगतो. कॉलेजच्या कट्ट्यांवरच पिकनिकचे प्लॅनिंग होते, पार्टीची तयारीही तिथलीच. मग हळूहळू कट्टा ही ओळख बनून जाते. कॅन्टीन मध्ये हरवण्याची मजा, लेक्चरला मारलेल्या दांड्या, गंमतीने काढलेल्या खोड्या, कारण नसताना केलेली भांडण, एकमेकांना चिडविणे, पिकनिक चे किस्से हे सर्व या कट्याने पहिलेले असते. हा कट्टा निर्जीव असला तरी त्यावर घालवलेले क्षण मात्र जिवंत असतात. कॉलेज कट्ट्यावरच्या गोष्टी पासून कुणी सुटले असे कधी झाले नाही. नव्या विद्यार्थ्याच्या चर्चे पासून ते एखाद्या प्रेमप्रकरणाचा झालेला किस्सा, राज ठाकरेंपासून ते अभ्यासाच्या चर्चा कट्ट्यावरच रंगत असतात. याच कट्यावर मला माझ्या वर्गातील मुलांची प्रेमप्रकरणे समजली. इथे प्रतेकजण कुणाच्या-ना-कुणाच्या नावाने ओळखला जाई. मी म्हणजे या सार्‍यांचा एक व्यासपीठच बनलो होतो. प्रत्येकजण आपली प्रत्येक गोष्ट माझ्याबरोबर शेअर करीत असे. त्याशिवाय आमचा एकही दिवस गेला नाही. असाच एखादा प्रसंग आला की हसता-हसता एक-मेकांना टाळी देण्यात मजा काही औरच असते. येवढं असूनही मी मात्र या सगळ्यात खूप वेगळा होतो. मित्रांबरोबर गप्पा मारता-मारता नकळत कशाची तरी जाणीव व्हायची, कोणाचीतरी चाहूल लगायची, मग मित्रांना कासातरी कटवत, “हा आलो रे जाऊनअसं म्हणत या कट्ट्यावरून मागे फिरायचो,“ ते कशामुळे? ते काय होत? मला माहीत नाही”. पण ते जेकाही होतं खूप चांगलं होत, कारण त्यामूळेच चांगलं काय? वाईट काय? याची जाणीव मात्र नेहमी व्हायची. आता तुम्ही म्हणाल कि कॉलेज कट्ट्यावर फक्त टिंगल टवाळ्याच करतोस का? तर असे नाही हा.. अभ्यास देखील करतो. वर्षभर गप्पांनी रंगलेला कट्टा परीक्षेच्या काळात नोटस, बुक्स, झेरोक्स आणि विद्यार्थी अश्यांनी कॉलेज कट्टा अभ्यासमय होऊन जातो. एखादा पक्षी ज्याप्रमाणे झाडाच्या सावलीत विसाव्यासाठी येत असतो. त्याचप्रमाणे विद्यार्थी या कट्ट्यावर एकत्र येत असतात. आपली सर्व सुख दुख इथेच एकमेकांना सांगतात. वर्षानुवर्ष एकच कट्टा असतो. मात्र त्यावर असणारे कॉलेज कट्टेकरी वर्षानुवर्ष बदलत असतात. परंतु विषय मात्र तेच असतात. हा असा कट्टा प्रत्येकाच्या जिव्हाळ्याचा असतो. कॉलेज आमची दुनिया, कट्टा आमचा पत्ता या पत्त्यावरती आमचा क्लास, आमचा श्वास, मैत्रीची सुरवात, दुष्मनीचा दावा कट्ट्यावरतीच. बोलतो आम्ही, भांडतो आम्ही कट्ट्यावरती, नडतो आम्ही, तोडतो आम्ही कट्ट्यावरती, प्रेमात पडतो प्रेमात वाहतो कट्ट्यावरती मस्तीत राहातो नादात जगतो कट्यावरती, जीवन फुलवतो आयुष्य सजवतो कट्ट्यावरती कॉलेज कट्टा, माझा कट्टा, आमचा कट्टा, नाद हा कट्याचा, कट्ट्यावरचा नाद आमचा. परीक्षेची नोटीस ऐकतो कट्ट्यावरतीच. लेक्चर ऑफ कळते कट्ट्यावरतीच, रिझल्ट उघडतात कट्ट्यावरती, इज्जत निघते, इज्जत मिळते कट्ट्यावरती. नापास होउन यायला इथे नसते कधी बंदी, वेगळी भाषा असते इथली वेगळे असतात कायदे, सिनीअर्स बरोबर चकाट्या पिटायचे असतात इथे फ़ायदे, अभ्यासाच्या विषयाला मात्र इथे नेहेमीच बंदी असते हिरवळीचा विषय मात्र इथे सगळ्यांच्या जीव्हाळ्याचा. प्रत्येक कॉलेजबाहेर एक कट्टा असतो कॉलेजला सुट्टी लागल्यावर मात्र हा कट्टा एकटाच पडतो. या कट्ट्याच्या जगातून बाहेर पडायची इच्छा का होत नाही? याचे उत्तर मला सापडलेले नाही. आणि सापडूही नाही शकत असचं वाटत. त्या कट्ट्याने दिलेल्या बऱ्यावाईट अनुभवांची शिदोरी घेऊन भविष्यात पाऊल ठेवायला विद्यार्थी तयार होतात. मग सुट्टीत कधीतरी त्या कट्ट्याची आठवण झाली, की मित्रांना फोनाफोनी होते आणि गप्पांच्या मैफलीत कधी त्या कट्ट्यावर जाऊन बसतो, ते कळतही नाही. म्हणून म्हणतो आयुष्यात एकदा तरी हा कॉलेज कट्टा अनुभवावाच. नाहीतर हे दिवस निघून गेल्यावर तुम्ही नक्की म्हणाल की, यार फक्त करियरचा विचार करताना कॉलेज लाइफ कुठे तरी एन्जोय करायच राहून गेल कि काय? मात्र सेमिस्टरचा रिझल्ट बघितल्यावर आमच्या मनाची अवस्था काहीशी अशी असते. ” आपला मित्र नापास झाल्यास जरा दु:ख होत आणि मित्र फर्स्ट क्लास मध्ये पास झाल्यास जरा जास्तच दु:ख होत .



Vaibhav V. Kudtarkar
S.Y.B.A.,
SRM_KDL-2014-15